टीसी की अनिवार्यता समाप्त : निजी स्कूल संचालक सामने आए

अधिकारियों पर लगाया शिक्षा की बर्बादी करने का आरोप

भोपाल- स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा टीसी की अनिवार्यता समाप्त करने के बाद प्रायवेट विद्यालयों के संचालक सामने आये है। आरोप लगाया कि नित नये आदेश निकालकर विभाग शिवा को गर्त में ले जा रहा है। इस प्रकार के नियम बच्चों के भविष्य पर भारी पड़ेंगे प्रायवेट स्कूल एसोसिएशन के अनुसार शिक्षा विभाग द्वारा टीसी की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। जो कि पूरी तरह से गलत और असंवैधानिक है। स्थानांतरण प्रमाण पत्र है एक ऐसा बिंदु है, जिससे बच्चे की आ. जाति कक्षा प्रमाणित होती है। दोस्तों आपको बता दे की स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर दिया जिसे देखकर स्कूल संचालक काफी नाराज है न्यायालय में भी टीसी ही मान्य है। कॉलेज भी बच्चों का प्रवेश पत्र लेते समय टीसी अवश्य रूप से मांगता है। बच्चा यदि बोर्ड बदलता है। तब भी टीसी माइग्रेशन एवं अंकसूची स्कैन कर ग्रास्ता प्राप्त की जाती है।

अब स्कूल बदलने पर नहीं देना होगी टीसी

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पहली से आठवीं तक का कोई विद्यार्थी यदि स्कूल बदलता है तो अब ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) की जरूरत नहीं पड़ेगी। मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर दिए हैं। अभी तक एक से दूसरे स्कूल में जाने पर टीसी मांगी जाती थी, जिससे अभिभावक परेशान होते थे। हालांकि पिछले साल 20 दिसंबर को विभाग ने एक आदेश जारी किया था जिसमें कहा गया था कि अगर बच्चा स्कूल बदलता है तो आवेदन पत्र के साथ उस स्कूल से टीसी लेकर देनी होगी, जिसमें उसने अंतिम बार पढ़ाई की हो। अब 29 नवंबर को विभाग ने फिर नया आदेश जारी कर पिछले साल के आदेश को निरस्त कर दिया है।

TC not Mandatory

इसलिए उठाया कदम

दोस्तों आपको बता दे covid 19 संक्रमण के कारण स्कूल पूरी तरह से बंद थे परन्तु निजी स्कूल संचालक पूरी फीस बसूल रहे थे जिसके कारण यह आदेश जारी किया गया आपको बता दे आरोप है कि विभाग में बैठकर नित नए प्रयोग कर रहे अधिकारी शिक्षा से पूरी तरह अनभिज्ञ दिख रहे हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत सिंह के अनुसार ऐसे में अपना स्वार्थसिद्ध करने के लिए शासकीय स्कूलों में विद्यार्थियों की धमता बढ़ाने के लिए रोज नए नए प्रयोग कर रहे हैं।

कभी ड्रेस एवं भोजन फ्री तो कभी कॉपी किताब, साइकिल और अब तो जूते चप्पल भी बच्चों को फ्री में दिए जाने लगे हैं। इससे भी उनको लगा कि बच्चे शासकीय स्कूलों में नहीं आ रहे हैं, तो टीसी की अनिवार्यता समाप्त कर दी। अजीत के अनुसार स्कूल संचालक शिक्षा विभाग को सचेत करना चाहते हैं कि आज काअभिभावक बदल चुका है। शिक्षा विभाग का तुगलकी फरमान पूरी तरह से गलत है। इससे शिवा की गुणवत्ता घटेगी कहीं से भी आए हुए बच्चे किसी भी कक्षा में प्रवेश ले सकते हैं।

हर 3 महीने बाद वह स्कूल बदल सकते हैं। बच्चा स्कूल जाने के लिए बाध्य नहीं रहेगा।. क्योंकि उसे मालूम कि हमेगकसी की आवश्यकता नहीं है। अभी तक 75 प्रतिशत उपस्थिति के लिए बच्चे स्कूल आते थे।टीसी की अनिवार्यता समाप्त होते ही यह सब खत्म हो जाएगा। शिक्षा धीरे धीरे रसातल में चली जाएगी। अभी तक वैसे भी मध्य प्रदेश साक्षरता के पायदान में बहुत दूर है। यह दूरी और बढ़ जाएगी।

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