प्राइमरी स्टूडेंट्स की होगी लिखित परीक्षा | Primary students will have written examination

राइटिंग स्किल्स, स्पीड व एक्यूरेसी के लिए लिखित परीक्षा भी होगी ऑनलाइन

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पहली से लेकर पांचवीं तक के स्टूडेंट्स की परीक्षाएं अलग अलग स्कूल में इसी माह से शुरू होने जा रही हैं। ऑनलाइन एग्जाम होने की वजह से एक साथ सभी बच्चों के ओरल एग्जाम टीचर नहीं ले सकते, | इसलिए अलग-अलग दिन स्लॉट बनाकर रोल नंबर के हिसाब से वीडियो कॉल पर ओरल एग्जाम होगा। |

प्राइमरी स्टूडेंट्स की होगी लिखित परीक्षा ताकि छूट न जाए उनके लिखने की आदत

माइक्रोसॉफ्ट टीम पर पीरियड बनाकर एक घंटे के भीतर क्लास के 10 बच्चों का ओरल एग्जाम होगा, फिर अगले स्लॉट के बच्चों का एग्जाम वहीं इस बार सिर्फ ऑब्जेक्टिव एग्जाम स्कूल नहीं ले रहे क्योंकि बच्चों की राइटिंग स्किल्स, याद करने की क्षमता कमजोर हो रही है. इसलिए इस बार ऑब्जेक्टिव के साथ डिस्क्रिप्टिव पेपर भी लिया जाएगा। लेकिन समस्या यह है कि कई बच्चे घर पर लिखने में कतरा रहे हैं और पैरेंट्स परेशान हैं कि बच्चों को कैसे लिखवाएं। इस बारे में सीबीएसई हेल्पलाइन मनोदर्पण के काउंसलर्स का कहना है कि यह समस्या अधिकाश पैरेंट्स की है क्योंकि न तो बच्चों के पास क्लास का माहौल है और न ही कोई कॉम्पिटीशन उनके सामने है।

Primary students will have written examination
Primary students will have written examination

ऑनलाइन पेपर सॉल्व करन के लिए पहली से पांचवीं तक के स्टूडेंट्स को पीडीएफ क्वेश्चन पेपर भेजा जाएगा जिसे वे एक घंटे में सॉल्व करके पीडीएफ बनाकर टीचर को भेजेंगे। इस तरह सारे पेपर्स होंगे। बच्चों के भविष्य का सोचते हुए लिखकर सवालों के जवाब देने का पैटर्न रखा है क्योंकि आगे की क्लास में उन्हें ज्यादा लिखना होगा। प्रोजेक्ट वर्क के अक, पीरियोडिक के अंक, अटेंडेंस, ओरल एग्जाम के अंक भी शामिल होंगे। पैरेंट्स टीवर के साथ संपर्क में रहे। सभी टीचर सिलेबस के बारे में बता रहे है। अब ऑनलाइन रिवीजन करा रहे हैं। ऑनलाइन पीटीएम हो रही है। बच्चों को कोई क्लास मिस न कराएं ताकि उनका पढ़ाई का रूटीन बन रहा रहे। इससे उनका रूझान स्टडी में रहेगा और वे आत्मविश्वास महसूस करेंगे।

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बच्चो का अनुशासन नहीं होने देंगे खराब

यदि बच्चे को हर दिन ऑनलाइन क्लास कराई अटेंड कराई जाए और शाम के समय पढ़ाई का टाइम-टेबल फॉलो किया जाए तो निश्चित ही बच्चे को पढ़ाई का माहौल मिलेगा। इसमें गलती पैरेंट्स की देखी जा रही है कि वे सुबह के समय बच्चे को क्लास से पहले नहीं उठाते और आंखों मूंदें बच्चे क्लास में बैठे रहते हैं। बच्चों को क्लास शुरू होने से आधा घंटा पहले प्रिपेयर करके रखें। वहीं शाम के समय फेयर कॉपी वर्क व एग्जाम का रिवीजन कराएं।

कई बार पैरेंट्स भी सोचते हैं कि स्कूल तो जाना नहीं है, जब समय होगा तब बच्चे को पढ़ा देंगे, यह अप्रोच गलत है। हर दिन एक समय पढ़ाई का बनाएं ताकि बच्चे का दिमाग भी इस बात के लिए तैयार रहे कि अब राइटिंग वर्क करने का समय है। टीचर्स बहुत मेहनत कर रहे हैं। स्कूल की कॉपी भले ही चेक होने स्कूल नहीं जा रही लेकिन बच्चों की स्कूल कॉपी में फेयर वर्क जरूर कराएं। उनकी रिवीजन कॉपी प्रिपेयर करें। स्पेलिंग लिखने, राइटिंग वर्क करने के लिए प्रोत्साहित करते रहे। -डॉ. राजेश शर्मा, प्रिंसिपल व काउंसलर

एक्सपर्ट्स ने सुझाए कुछ उपाय जो पैरेंट्स के लिए होंगे हेल्पफुल

  • इस समय अपना फस्ट्रेशन बच्चों पर न निकालें।
  • उनकी मनस्थिति समझे कि पढ़ाई करने का कोई लक्ष्य उनके सामने नहीं है इसलिए उन्हें प्यार से समझाएं।
  • बच्चों को छोटे-छोटे टेस्ट पेपर बनाकर दें। ताकि वे कॉम्पिटिशन महसूस करें। टाइम देकर पेपर सॉल्व कराएं, बच्चों के सामने चैलेंज होता है तो वे उसे जरूर पूरा करते हैं।
  • उन्हें बार-बार पढ़ते नहीं हो यह कहकर चिहाए नहीं। बात-बात पर उलाहना न दें। क्लास के दौरान बच्चों को डांटते न रहें।
  • क्लास के समय उन पर जल्दी लिखने का दवाब न बनाएं क्योंकि स्क्रीन से कॉपी में नोट करने में समय लगता है।
  • डरा-धमकाकर नहीं बल्कि घर में सुबह शाम पढ़ाई के रूटीन का माहौल बनाए।
  • बच्चों की कोई क्लास मिस न होने दें।
  • यदि ये टीचर द्वारा दिए गए होमवर्क को भी पूरा करते हैं तो उनकी काफी अच्छी प्रैक्टिस होती है। इसके अलावा स्कूल द्वारा कराए जा रहे रिवीजन को गंभीरता है।
  • रात को सोने से पहले बच्चों से औरल पर बात करें, जैसे रिसाइटेशन, स्पेलिंग, स्टोरी से सवाल-जवाब आदि।

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