पाठ्यक्रम अधूरा:- कैसे देंगे वार्षिक परीक्षा छात्र-छात्राएं

कोरोना के कारण स्कूलों का पठन-पाठन का प्रभावित रहा है स्थिति यह है कि स्कूलों में नियमित कक्षाओं का संचालन ना होने के कारण एवं ऑनलाइन पठन-पाठन की अधिकांश विद्यार्थियों को ना मिलने के कारण उनकी पढ़ाई सही तरीके से नहीं हो सकी है। जिससे छात्रों का पाठ्यक्रम कंप्लीट नहीं हो पाया है बच्चों की पढ़ाई अधूरी है। उधर प्रदेश सरकार द्वारा आनन-फानन में परीक्षाएं आयोजित करने के लिए समयसारणी जारी कर दी गई है जारी समयसारणी के अनुसार बोर्ड परीक्षाओं की परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू होने वाली है। पाठ्यक्रम अधूरा होने के कारण विद्यार्थी समस्या में है कि वह कैसे परीक्षा देंगे।

बोर्ड कक्षाओं के अलावा अन्य कक्षाओं की कॉपियां विद्यालय स्तर पर ही जांचने के कारण विद्यार्थी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि वह अनुसरण नहीं होंगे किंतु हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की कॉपियां बाहर जांचने के कारण उनमें सबसे ज्यादा चिंता बनी हुई है चर्चा के दौरान बोर्ड कक्षाओं के कई विद्यार्थियों ने कहा कि परीक्षाओं का आयोजन प्रदेश सरकार द्वारा काफी जल्दबाजी में किया जा रहा है।उधर कोरोना संक्रमण के विद्यार्थियों ने पठन-पाठन का कार्य काफि विलंब के साथ शुरू हुआ है। जिसके चलते विद्यालयों में सही तरीके से पढ़ाई तक नहीं हो स । शासन द्वारा कोरोना के चलते विद्यालयों के बंद होने के दौरान ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन की व्यवस्था बनाई गई थी उसमें भी अधिकांश छात्रों के पास स्मार्ट मोबाइल न होने के कारण वह पठन-पाठन नहीं कर सके।

अच्छी तरह से ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हो सकी छात्रों  की-

ऑनलाइन क्लासो का संचालन करने में संबंधित शिक्षा भी पूरी तरह से लापरवाह बने रहे। बड़े विद्यालयों को छोड़ दिया जाए तो अन्य विद्यालयों में ऑनलाइन पठन-पाठन की व्यवस्था भी शिक्षकों द्वारा नहीं बनाई गई थी। इसके अलावा शासकीय विद्यालयों में शिक्षकों के काफी पद खाली पड़े हुए हैं। इस वजह से कई विषयों की पढ़ाई भी नहीं हो सकी। यह अवश्य है कि हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूल में अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था बनाई गई थी। किंतु इसका लाभ भी ज्यादातर विद्यालयों में इसलिए नहीं मिल सका क्योंकि कोरोना के चलते विद्यालय में पढ़ाई का सिलसिला ही काफी देर से शुरू हुआ। इसके अलावा विद्यालयों में कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे के चलते कक्षाओं का संचालन भी समुचित तरीके से नहीं हो सका।

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अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों का पाठ्यक्रम अधूरा रहा-

स्थिति यह रही कि कोरोना के चलते हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में पठन-पाठन का कार्य सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। वहीं कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई भी समुचित व्यवस्था के अभाव में इस वर्ष पूरी तरह से बाधित रही है। प्राथमिक एवं माध्यमिक में शिक्षकों की भारी कमी के चलते विद्यालय खोलने की महज औपचारिकताएं ही हुई है। प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में इस वर्ष अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति भी ना होने एवं शिक्षकों की भारी कमी के चलते अधिकांश स्कूलों पाठ्यक्रम आधा अधूरा है शहरी क्षेत्रों के विद्यालयों को छोड़ दिया जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में तो स्थिति यह है कि कई विद्यालयों में आधा कोर्स भी शिक्षकों द्वारा नहीं पूरा किया गया है। फिर भी परीक्षा देने की मजबूरी बन गई है।

महत्वपूर्ण जानकारियाँ —

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