ऑनलाइन एग्जाम की आदत, ऑफलाइन में पड़ी भारी – Mp offline exam news

भोपाल की रहने वाली एक 13 वषीर्य किशोरी को ऑनलाइन एग्जाम की आदत सी लग गई थी वह ऑनलाइन एग्जाम में टाॅप कर लेती थी, अचानक जब नोटिस आया कि आगामी परीक्षा ऑफलाइन मोड पर आयोजित होगी तो उसे डर लगने लगा और वह अंदर ही अंदर सोचते जा रही थी कि अब उसका परिणाम क्या होने वाला है। उसे अपने आप पर आत्म विश्वास नहीं था, वह ऑनलाइन एग्जाम में तो टाॅप कर लेती परंतु ऑफलाइन एग्जाम सुनकर वह भयभीत हो गई और गलत कदम उठाने पर आमादा हो गई, उसने पूरी बात अपने भाई को बताई आइए जानते हैं क्या था पूरा मामला।

ऑनलाइन एग्जाम की आदत, ऑफलाइन में पड़ी भारी – Mp offline exam news

कोविड संक्रमण के चलते दो साल स्कूल से दूर रहना बच्चों की लर्निंग एबिलिटी पर भारी पड़ रहा है। राइटिंग स्पीड कम होना, याद रखने की क्षमता में कमी और इस तरह की अन्य समस्याओं से बच्चे गुजर रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण है, रेलवे चाइल्ड लाइन के पास पहुंची 13 वर्षीय किशोरी। बच्ची केवल इसलिए घर छोड़कर निकल आई क्योंकि पेपर बिगड़ने के कारण उसे फेल होने की चिंता सता रही थी। काउंसलिंग में बच्ची ने बताया कि सातवीं कक्षा के ऑफलाइन एग्जाम में वह चाहकर भी स्पीड से पेपर नहीं लिख पाई। इसलिए डर के मारे उसने यह कदम उठाया। बच्ची को परिवार को सौंप दिया गया है।

  • ऑफलाइन एग्जाम बना मुसीबत
  • पहला पेपर बिगड़ गया तो किशोरी ने डर के कारण छोड़ दिया था घर
  • कोरोना काल में लिखने की आदत छूटने से किशोरी पूरा पेपर नहीं कर सकी

कजिन को किया था आगाह

किशोरी इंदौर जिले की रहने वाली है। किशोरी ने स्कूल से ऑफलाइन एग्जाम की जानकारी मिलने के बाद अपने कजिन से कहा था कि उसे डर लग रहा है कि वह बेहतर परफॉर्म नहीं कर पाएगी। उसने यह भी कहा था कि यदि वह फेल हो गई तो या तो सुसाइड कर लेगी या फिर घर से बहुत दूर कहीं चली जाएगी। रेलवे चाइल्ड लाइन के को-ऑर्डिनेटर संजीव जोशी ने बताया कि किशोरी के घर से निकलते ही परिवार ने पुलिस को सूचना दी थी।

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यहाँ मिली किशोरी

विभिन्न स्टेशनों पर किशोरी को ट्रेस करना शुरू किया गया। इंदौर रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी में किशोरी ओवरनाइट ट्रेन में बैठते हुए नजर आई। भोपाल में जीआरपी और रेलवे चाइल्ड लाइन ने किशोरी को रेस्क्यू किया। बता दें, मामले में रेलवे चाइल्ड लाइन ने फॉलोअप किया है और बच्ची अब पॉजिटिव एप्रोच के साथ आगे के पेपर की तैयारी कर रही है।

उसे डर था कि सब क्या सोचेंगे

किशोरी ने काउंसलिंग में बताया कि घर का माहौल हेल्पफुल है। वह हमेशा टॉपर की लिस्ट में शामिल रही है। इस साल भी उसे यही लग रहा था कि एग्जाम ऑनलाइन होंगे। जब ऑफलाइन एग्जाम का नोटिस आया तभी उसे डर लगा था कि वह अच्छा रिजल्ट नहीं ला पाएगी। एक पेपर बिगड़ा तो उसने सोचा कि बेहतर है कि वह बाकी के पेपर न दे। किशोरी ने कहा कि ट्रेन में बैठने के बाद उसे एहसास हो गया था कि उससे गलती हो गई है। रात का वक्त था, उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो लौटने के लिए क्या करे। किशोरी ने कहा कि वह आगे से ऐसा कदम नहीं उठाएगी।

महत्वपूर्ण जानकारियाँ —

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