भोपाल

कक्षा 1-8वी तक पढ़ने वाले बच्चों को विद्यालय बदलने पर नहीं देनी होगी टीसी- (MP Board New Update)

भोपाल : कक्षा 1-8वी तक का विद्यार्थी यदि स्कूल बदलता है तो अब उन्हें टी सी देने की कोई जरुरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिया है. इस आदेश के आने से जो बच्चे परेशान रहते थे उन्हें अब परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. क्योंकि अभी तक यह आदेश था कि अगर कोई अपना स्कूल छोड़कर अन्य किसी दूसरे स्कूल में पढ़ाई करना चाहता है तो उसे टीसी की जरूरत पड़ती थी अब उन बच्चों के लिए यह आदेश सोने पर सुहागा जैसा है.

क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि किसी बच्चे को अचानक कोई परेशानी हो जाती है और वो ‌अपना स्कूल बदलना चाहता है, तो अब वो अपनी मर्जी से दूसरे स्कूल में पढ़ाई कर सकता है. इसके लिए दूसरे स्कूल में न तो उसे ट्रान्सफर सर्टिफिकेट दिखाने की कोई जरुरत नहीं
पड़ेगी. केवल बच्चे की उम्र और योग्यता के आधार पर ही उनका नामांकन कर लिया जायेगा.

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प्राइवेट स्कूलों की मनमानी हुई खत्म-

अक्सर देखा जाता था कि प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधक एवं प्रधानाध्यापक अपनी ‌मनमानी करते थे. टीसी के नाम पर मनचाही फीस वसूला करते थे. ऐसे में गरीब घरों से पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता भारी भरकम फीस दे पाने में असमर्थ रहते थे. और इस तरह से उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था. ऐसी स्थिति में तो कभी -कभी ऐसी स्थिति पैदा हो जाती थी कि वह बीच में ही अपने बच्चों की पढ़ाई को बन्द करवा देते थे। इससे बच्चों एवं अभिभावकों दोनो का सपना अधूरा रह जाता था। मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग के इस आदेश से उनके चेहरे पर मुस्कान दिखाई दे रही है।

प्राइवेट स्कूलों में रोष की स्थिति व्याप्त-

मध्यप्रदेश सरकार के इस आदेश से प्राइवेट स्कूलों की प्रबंधन समिति में इस आदेश के खिलाफ रोष जताया है। उनका कहना कि सरकार के इस आदेश से अभिभावक अपनी मनमानी करने लगेंगे और फीस देने के नाम पर आनाकानी करने लगेंगे। वहीं निजी स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत सिंह ने इस आदेश का घोर विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इस आदेश से अभिभावक फीस नहीं देंगे। और निजी स्कूलों की हालत खराब हो जायेगी। और फीस देने के समय बच्चे स्कूल छोड़कर चले जायेंगे।

वहीं कुछ लोगों का कहना है कि कोविड काल में निजी स्कूलों ने बहुत ही मनमानी की है। और सरकार के आदेश की अवहेलना की है एक ओर जहां स्कूल आदि बन्द थे शिक्षा व्यवस्था में व्यवधान आ रहा था ठीक वहीं दूसरी ओर निजी स्कूलों में पढ़ाई के नाम पर मनचाही उगाही की जा रही थी। जिससे अभिभावक भी परेशान रहते थे। अब सरकार के इस आदेश से प्राइवेट स्कूलों ‌के मालिकों में रोष है तो वहीं बच्चों एवं अभिभावकों में खुशी का माहौल है।

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