एमपी बोर्ड परीक्षा फॉर्म लेट भरने पर मंडल को लाखों की आय – Mp board exam form late fees news

मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षा 17 फरवरी 2022 से आयोजित होने वाली है। मध्य प्रदेश में इस बार लगभग 18 लाख छात्रों ने कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा का फाॅर्म भरा है। और वहीं लगभग 12 लाख छात्रों ने कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा का फाॅर्म भरा है। प्रत्येक विद्यार्थी के परीक्षा फाॅर्म भरने का शुल्क 900 रूप्ये हैं वहीं अगर कोई विद्यार्थी नियत तिथि के बाद अगर फाॅर्म भरता है तो 900 की बजाये मंडल उससे 10 हजार रूप्ये लेट फीस के नाम पर वसूलता है। जो कि बिल्कुल उचित नही है। लेकिन मध्य प्रदेश में लगभग 350 विद्यार्थियों ने लेट फीस देकर एग्जाम फाॅर्म भरा है तो आइए जानते हैं कि उन्होंने इतना लेट क्यों भरा परीक्षा फाॅर्म।

एमपी बोर्ड परीक्षा फॉर्म लेट भरने पर मंडल को लाखों की आय

एमपी बोर्ड द्वारा भारी भरकम विलंब शुल्क लगाने के बावजूद सैकड़ों स्टूडेंट्स निर्धारित तारीख तक परीक्षा फॉर्म जमा नहीं कर सके। इस साल आखिरी समय में 900 की जगह 10 हजार देकर 10-12वीं के 350 विद्यार्थियों ने परीक्षा फॉर्म जमा किए हैं। इस तरह 31.85 लाख रुपए बोर्ड के खाते में अतिरिक्त शुल्क के रूप में जमा हुए हैं। लेट फीस के साथ परीक्षा फॉर्म जमा करने वाले अधिकांश विद्यार्थी स्वाध्यायी हैं। एमपी बोर्ड ने सामान्य शुल्क 900 रुपए के साथ परीक्षा फॉर्म जमा करने के लिए जुलाई से 7 अक्टूबर तक का समय दिया था। इसके बाद तारीख के अनुसार 6 फरवरी तक विलंब शुल्क के परीक्षा फॉर्म जमा करने की सुविधा विद्यार्थियों को दी गई थी। बावजूद बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने परीक्षा फॉर्म नहीं भरा था।

जनरल प्रमोशन के लालच में विलंब से भरे फॉर्म

दरअसल, दिसंबर से जनवरी तक कोरोना के मामले बढ़ने के बाद परीक्षाएं निरस्त करने के कयास लगाए जा रहे थे। इसके चलते जनरल प्रमोशन की लालच में कई छात्रों ने 10 हजार रुपए फीस देकर प्राइवेट में परीक्षा फॉर्म भर दिया। इन विद्यार्थियों को उम्मीद थी कि परीक्षा निरस्त होती है, तो माशिमं पिछले वर्ष की तरह प्राइवेट विद्यार्थियों को जनरल प्रमोशन देगा एवं नियमित विद्यार्थियों का रिजल्ट तिमाही- छमाही एवं प्री-बोर्ड – के अंकों के आधार पर तैयार होगा।

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सामान्य फीस 9 सौ और लेट फीस 10 हजार

ज्यादातर विद्यार्थी जो राज्य बोर्ड से परीक्षा देते हैं वह सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब विद्यार्थी होते हैं अतः 900 के स्थान पर 10 हजार रुपए वसूलना एक तरह का उत्पीड़न है । उन्होंने मांग की कि सरकार तत्काल इस तुगलकी निर्णय को वापस ले और लेट फीस का युक्तियुक्त करण कर नए आदेश जारी करे। कांग्रेस गरीब विद्यार्थियों की लूट बर्दास्त नहीं करेगी।

लेट फेस को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल

माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा परीक्षा फीस भरने में 1 दिन की भी देरी होने पर 10 गुना दंड लगाना गरीब छात्रों के ऊपर जजिया कर की तरह है। प्रदेश कांग्रेस मीडिया उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने माध्यमिक शिक्षा मंडल के ताजे परिपत्र जिसमें 900 रुपए परीक्षा फीस और 10000 रुपए लेट फीस लेने का निर्णय किया गया है की निंदा की है। गुप्ता ने कहा कि डिजिटल युग में अगर सर्वर डाउन हो या पोर्टल डाउन हो तो फीस भरने में देरी भी हो सकती है।

लेट फीस पर क्या कहा स्कूल शिक्षा मंत्री ने

बोर्ड परीक्षा की फीस 900 रूपये लगती है लेकिन यही फीस अगर देर से दी जाए या परीक्षा फाॅर्म लेट भरा जाए तो 900 की जगह 10 हजार रूपये देनी पड़ जाती है, जितना कि किसी आम आदमी के महीने की सैलरी होती है, इसी के चलते कांग्रेस नेता भूपेंद्र गुप्ता ने आवाज उठाई थी और उन्हें स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने पलटकर जवाब दिया कि कमलनाथ सरकार के समय भी इतनी ही फीस ली जाती थी, और बताया कि लेट फीस 10 हजार रूपये लेना यह पुराना आदेश है और बताया कि सरकार इस मामले में अगले साल विचार करेगी।

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