एमपी बोर्ड परीक्षा केंद्र में सैनिटाइज़र के लिए करोड़ो खर्च – जानें पूरी खबर | Mp board exam center facilities

एमपी बोर्ड की 10वीं की परीक्षाएं 18 से एवं 12वीं की परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू होंगी। इसके लिए चार हजार से अधिक एग्जाम सेंटर बनाए गए हैं। आमतौर पर हर परीक्षा में प्रत्येक सेंटर को 80 हजार से डेढ़ लाख रुपए का भुगतान बोर्ड की तरफ से किया जाता है। इस बार बोर्ड को एग्जाम सेंटरों को सेनिटाइज करने के लिए करीब एक करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च करना होंगे।

एमपी बोर्ड परीक्षा केंद्र में सैनिटाइज़र के लिए करोड़ो खर्च

भोपाल में यह परीक्षा 104 केंद्रों पर होगी। कोरोना के चलते एग्जाम सेंटरों में इस बार सेनिटाइजेशन, थर्मल स्क्रीनिंग अनिवार्य रूप से की जानी है। परीक्षार्थियों की थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी। यदि किसी को बुखार या सर्दी जुकाम है तो उसे आइसोलेशन कक्ष में बैठाया जाएगा। विद्यार्थियों को डेढ़ घंटे पहले केंद्रों पर पहुंचना होगा।

परीक्षा केन्द्रों पर इस बार अलग रहेगा नजारा

परीक्षा केंद्रों से सौ मीटर की दूरी पर बैरिकेड लगाए जाएंगे। इस दायरे में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। परीक्षा केंद्र पर सीलबंद लिफाफा खोलने से लेकर ढाई घंटे तक की अवधि तक केंद्र अध्यक्ष, सहायक केंद्र अध्यक्ष, सुपरवाइजर सहित स्टाफ के मोबाइल फोन स्विच ऑफ करवा कर दिए जाएंगे। डीईओ नितिन सक्सेना ने बताया कि कोविड प्रोटोकॉल के तहत पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील केंद्रों पर कैमरे लगाए जाएंगे। इन केंद्रों पर मंडल के उड़नदस्ते के अलावा डीईओ द्वारा गठित उड़नदस्ता भी सक्रिय रहेगा। संयुक्त संचालक भी स्कूलों में निरीक्षण करने जाएंगे।

Mp board exam center facilities
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जूते मोजे, टोपी निकालकर होगी चैकिंग

परीक्षा के दौरान प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए परीक्षार्थियों को 10 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। परीक्षा शुरू होने से 5 मिनट पहले आंसरशीट वितरित की जाएगी। परीक्षा शुरू होने के 15 मिनट बाद किसी छात्र को परीक्षा में शामिल नहीं किया जाएगा। छात्रों के जूते मोजे, टोपी तथा जैकेट आदि की चेकिंग की जाएगी। कोरोना के कारण एग्जाम सेंट्रों में सेनिटाइज किया जाएगा। इसके लिए अलग से भुगतान किया गया है।

बच्चों को परीक्षाओं के तनाव से बचाना हमारी जिम्मेदारी

परीक्षाएं बच्चों की पूर्ण प्रतिभा का मूल्यांकन नहीं हैं। अभिभावकों को कोशिश करनी चाहिए कि बच्चा अतिशय दबाव महसूस ना करे। बच्चों को परीक्षाओं के तनाव से बचाना सबकी जिम्मेदारी है।

बच्चों के स्वास्थ्य पर होगी अधिकारियों की निगरानी

आईएएस व माशिमं की अति. सचिव शीला दाहिमा ने सीसीएफ की कार्यशाला में यह बात कही। फाउंडेशन के अध्यक्ष राघवेंद्र शर्मा और सचिव डॉ. कृपाशंकर चौबे ने भी वक्तव्य दिए। उन्होंने अभिभावकों से अनुरोध किया कि बेवजह की दौड़ में बच्चों को शामिल करने की जगह समग्र विकास पर ध्यान दें। शीला दाहिमा ने कहा कि बच्चे को तनाव मुक्त होकर परीक्षा दिलाना परिवार को भी समझना होगा। बच्चों के लिए 18002330175 और 14425 हेल्पलाइन नंबर मौजूद हैं। इन पर विशेष विशेषज्ञ पाठ्य विषयों के अलावा मनोविज्ञान पर भी निःशुल्क परामर्श के लिए तैनात किए गए हैं।

रातभर अनावश्यक न जागें

दाहिमा ने कहा कि बाल मनोविज्ञान को दरकिनार कर अभिभावक भी अनावश्यक दबाव बनाते हैं। परीक्षा के समय रात भर अनावश्यक जागना गलत है। पूरी नींद स्फूर्ति और क्षमता को बढ़ाती है। साथ ही परीक्षा के समय में भी बच्चे अपनी रुचि के काम करते रहें, ताकि उन्हें पढ़ाई बोझिल ना लगे। सोशल मीडिया के ज्यादा प्रयोग से भी बच्चे संवेदनहीन और हिंसक बन रहे हैं । इस पर ध्यान दें । परीक्षा की चरणबद्ध तैयारी करनी चाहिए।

महत्वपूर्ण जानकारियाँ —

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