एमपी बोर्ड परीक्षा एक दिन पहले बदले गए 25 से ज्यादा केंद्राध्यक्ष – mp board exam center change

सीधी शिक्षा विभाग में काफी दिनों से हाई स्कूल, हायर सेकेण्ड्री स्कूलों में प्रभारी प्राचार्य बनाने के नाम से खुलेआम पैसे की वसूली की जा रही थी। पैसे के दम पर कनिष्ठ शिक्षक प्रभारी प्राचार्य बन गए हैं। जिला शिक्षा कार्यालय में नियम निर्देशों के तहत काम नहीं होता। पैसे के दम पर हर अवैधानिक कार्य खुलेआम लिपिकों के द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी से करा लिया जाता है। आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी लेने-देन में इतने मशगूल हो गए हैं कि वो कलेक्टर के नाम पर अवैध वसूली करने में नहीं। हिचकिचाते कल 17 फरवरी से 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं संचालित की जानी थीं 15 फरवरी को जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कलेक्टर के अनुमोदन के उपरांत लगभग दो दर्जन से ज्यादा केंद्राध्यक्ष व सहायक परीक्षा केंद्र प्रभारियों की ड्यूटी काटकर नए शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई।

एमपी बोर्ड परीक्षा एक दिन पहले बदले गए 25 से ज्यादा केंद्राध्यक्ष – mp board exam center change

जिला शिक्षा अधिकारी का कहना कि कलेक्टर के निर्देश पर परीक्षा केंद्र प्रभारियों को बदला गया है। उधर विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार परीक्षा ड्यूटी से बचने के लिए शिक्षकों ने पैसा देकर अपना नाम ड्यूटी से कटवा लिया है। आखिर पूर्व में जिन व्यक्तियों की ड्यूटी बोर्ड परीक्षा संचालन करने के लिए लगाई गई थी ऐसी कौन सी स्थिति उत्पन्न हो गई कि बोर्ड परीक्षा के एक दिन पहले एक साथ दो दर्जन से ज्यादा परीक्षा केंद्र प्रभारियों को बदल दिया गया। इन सब मामलों से जहां एक ओर जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा परीक्षा केंद्र प्रभारी के अदला-बदली से बोर्ड परीक्षा का माहौल खराब हो रहा है वहीं दूसरी ओर कलेक्टर की भी बदनामी हो रही है।

  • बोर्ड परीक्षा एक दिन पहले बदले गए 2 दर्जन से ज्यादा केंद्राध्यक्ष से
  • कलेक्टर के अनुमोदन के नाम पर पैसा लेकर अदला-बदली के आरोप
mp board exam center change
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हर मौके पर पैसे का जुगाड़

बताया जा रहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी विभाग कोई भी मौका हो पैसा निकालने का रास्ता खोज ही लेता है। अभी एक नया मामला बोर्ड परीक्षा में केंद्राध्यक्ष एवं सहायक केंद्राध्यक्ष नियुक्ति से संबंधित आया है जिसमें पहले तो 100 किलोमीटर दूर तक के शिक्षकों को नियुक्त किया गया और फिर 5000 से 8000 रुपये तक लेकर ड्यूटी काट दो गई। कल 17 से परीक्षा संचालित थी और परसों 16 को 12 बजे के बाद नए नियुक्त केंद्राध्यक्ष एवं सहायक केंद्राध्यक्ष को आनन-फानन फोन द्वारा सूचित करने की कार्यवाही शुरू किया गया।

शिक्षकों की ड्यूटी निरस्त की गई

बोर्ड परीक्षा जैसे कार्य में भी जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा इस प्रकार के भष्टाचार के संबंध में सचिव माध्यमिक शिक्षा मण्डल भोपाल से दूरभाष पर संपर्क कर जानकारी दी गई है। ज्ञात हो कि जिले के अनेकों विद्यालय ऐसे है जहां 4 से 6 वरिष्ठ शिक्षक प्राचार्य व्यायाता, उच्च माध्यमिक शिक्षक पदस्थ है जिनमें से कहीं किसी एक को या किसी की ड्यूटी नहीं लगाई गई। वहीं दूसरी ओर जिन विद्यालयों में 1 या 2 वरिष्ठ शिक्षक ही पदस्थ हैं वहां दोनों की ड्यूटी लगाई गई है। विद्यालय अगर संकुल स्तर का है तो वहां के सभी कार्य प्रभावित होंगे जिसकी चिंता किसे और क्यों होगी। विभाग के बाबुओं द्वारा कलेक्टर से अनुमोदन के नाम पर रेट बढ़ाया जाता है। बोर्ड परीक्षाओं में 29 शिक्षकों की डियूटी काटी एवं जोड़ी गई जिसमें लाखों का खेल एक दिन में किया गया।

कलेक्टर के नियंत्रण के बाहर है डीईओ कार्यालय

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय काफी असों से अपनी विवादित कार्यशैली को लेकर सुर्ख़ियों में बना हुआ है। जिला शिक्षा अधिकारी नवल सिंह के पदस्थ होने के बाद से स्थिति और भी पटरी से उतर चुकी है। कार्यालय में पूरी तरह से बाबुओं का राज कायम है। कुछ खास बाबुओं के इशारे पर ही कार्य हो रहे हैं। सुविधा शुल्क वसूलने के बाद यह नहीं देखा जाता कि यह नियम के तहत काम हो रहा है अथवा नहीं। इसी वजह से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जारी होने वाले अधिकांश आदेशों में नियमों की पूरी तरह से अनदेखी की जाती है।

स्थिति ये है कि अभी स्कूलों की मान्यता का विवाद खत्म नहीं हुआ अब बोर्ड परीक्षाओं के दौरान केंद्राध्यक्षों एवं सहायक केंद्राध्यक्षों की परीक्षा के एक दिन पहले नाम काटने ३ एवं जोड़ने को लेकर फिर से जिला शिक्षा विभाग चर्चाओं में आ चुका है। शिक्षकों के बीच चर्चा है कि यदि सुविधा शुल्क हो तो डीईओ कार्यालय से किसी भी तरह का आदेश जारी कराया जा सकता है। विवाद ज्यादा गहरा जाने पर सफाई दी जाती है कि कलेक्टर के अनुमोदन पर ऐसा किया गया है।

जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है

कलेक्टर के अनुमोदन के उपरांत केंद्राव्यक्षों व सहायक केंद्राध्यक्षों को बदला गया है। कलेक्टर के द्वारा जो निर्देश प्राप्त होते हैं उनका पालन करना मेरा नैतिक कर्तव्य है। पैसा लेकर केंद्राध्यक्षों की अदला बदली करने की बात पूरी तरह से असत्य है। नवल सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी, सीधी

महत्वपूर्ण जानकारियाँ —

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