एमपी में बोर्ड पैटर्न पर होंगी कक्षा 5वीं एवं 8वीं की परीक्षाएं – सभी छात्रों के लिए जरूरी खबर

पांचवीं-आठवीं की बोर्ड पैटर्न पर परीक्षा सिर्फ सरकारी स्कूलों में आयोजित की जाएगी। प्रायवेट स्कूल इससे मुक्त रहेंगे। मंत्रालय से अनुमति मिलते ही राज्य शिक्षा केंद्र पांचवीं-आठवीं की परीक्षा की तिथि घोषित करेगा। पांचवीं-आठवीं की परीक्षा में सरकारी स्कूलों के 17 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे।

एमपी में बोर्ड पैटर्न पर होंगी कक्षा 5वीं एवं 8वीं की परीक्षाएं

राज्य मंत्री स्कूल शिक्षा इंदर सिंह परमार ने सत्र 2021-22 की पांचवीं एवं आठवीं कक्षा को परीक्षाएं बोर्ड के आधार पर लेने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने इसकी घोषणा दिसंबर में की थी। इससे पहले राज्य शिक्षा केंद्र (आरएसके) हर साल की तरह बोर्ड पैटर्न पर मार्च में परीक्षा कराने की तैयारी में था, लेकिन मंत्री की घोषणा के बाद विभाग में खलबली मची हुई है। यही कारण है कि दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं अब एक माह लेट यानी अप्रैल में लेने का निर्णय लिया है। खास बात यह है कि पांचवीं एवं आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं केवल सरकारी स्कूलों में ही होगी।

प्राइवेट स्कूल में नहीं होगी पांचवीं-आठवीं की बोर्ड परीक्षा

अभी केवल सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों की परीक्षा बोर्ड पैटर्न पर होगी। प्रायवेट स्कूलों को इस साल शामिल नहीं किया गया है। यह परीक्षा अप्रैल में लेने की तैयारी की जा रही है। प्रायवेट स्कूलों को इस व्यवस्था से मुक्त रखा गया है। ऐसे में प्रायवेट स्कूल इस साल भी मनमर्जी से छात्र छात्राओं का रिजल्ट तैयार कर सकेंगे। वहीं सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को कठिन परीक्षा से गुजरना होगा स्कूल प्रधानाचार्यों का कहना है कि कोरोना संक्रमण के कारण इस साल भी छात्र छात्राओं की पढ़ाई नहीं हो सकी है। बोर्ड परीक्षा की कोई तैयारी भी नहीं है। ऐसे में विद्यार्थी बड़ी संख्या में फेल हो सकते हैं।

 

MP Board 5th & 8th exams conduct on board pattern
MP Board 5th & 8th exams conduct on board pattern

2019 से चल रही है तैयारी

एक्ट में संसोधन के बाद 2019 में पांचवी व आठवीं में बोर्ड की तर्ज पर वार्षिक परीक्षा ली गई थी, लेकिन कोविड के दो पेपर नहीं हो पाए थे, तो उस साल बच्चों को जनरल प्रमोशन दे दिया गया था। वहीं 2020 में पहली से आठवीं तक की कक्षाओं के विद्यार्थियों के घर-घर वर्कशीट भेजकर वार्षिक मूल्यांकन किया गया था, लेकिन संशोधन के तीन साल बाद भी विभाग प्रायवेट स्कूलों के लिए कोई प्लान तैयार नहीं कर सका।

मामले बढ़े तो घर पर वर्कशीट भेजकर मूल्यांकन होगा

कीविड-19 के बढ़ते मामलों के कारण अगर परीक्षा निरस्त हुई तो राज्य शिक्षा केंद्र ने प्लान बी भी तैयार किया है। कोरोना की तीसरी लहर मार्च के अंत में बढ़ने की आशंका है। ऐसे में बोर्ड परीक्षाएं नहीं हुई तो विद्यार्थियों को घर-घर वर्कशीट भेजी जाएगी। वर्कशीट पर बच्चों द्वारा जवाब लिखने के बाद अभिभावक उसे स्कूल में जमा करेंगे।

14 साल बाद आधे छात्र ही देंगे बोर्ड परीक्षा

प्रदेश में पांचवीं आठवीं के विद्यार्थियों की बोर्ड परीक्षा 2007-08 में बंद कर दी गई। थी। इससे पहले सरकारी एवं प्रायवेट दोनों ही स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की पांचवीं एवं आठवीं कक्षा की परीक्षा बोर्ड होती थी, लेकिन निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) लागू होने के बाद पहली से आठवीं तक के छात्रों की परीक्षा बंद कर वार्षिक मूल्यांकन शुरू कर दिया था। आरटीई के तहत किसी भी छात्र को फेल नहीं किया जा सकता था। इससे मूल्यांकन में स्कूलों में सभी विद्यार्थियों को पास किया जाने लगा। इससे कमजोर छात्र भी पास होने लगे। केंद्र की अनुमति मिलने के बाद मप्र शासन ने 2019 में आरटीई में संशोधन किया। इसके तहत पांचवी व आठवीं के विद्यार्थियों को बोर्ड पैटर्न पर वार्षिक परीक्षा होगी। साथ ही फेल होने वाले विद्यार्थियों को आगे की कक्षा में प्रमोट नहीं किया जाएगा।

महत्वपूर्ण जानकारियाँ —

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