Government should end the system of pre-audit in higher education department soon

Government should end the system of pre-audit : उच्च शिक्षा विभाग द्वारा कॉलेजों में रिटायर्डमेंट के बाद की गई प्रीऑडिट की व्यवस्था समाप्त करने की मांग उठी है। अन्य विभागों में भी अनेक समस्याओं को लेकर कर्मचारियों का कहना है कि अधिकारी लगाता सुविधाओं में रोड़ा बन रहे हैं। इसके लिए सरकार को समीक्षा का अभियान चलाना चाहिए। मप्र राज्य कर्मचारी संघ में उच्च शिक्षा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अनिल भार्गव का कहना है कि महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में रिटायर्डमेंट के बाद प्री-आडिट करवाया ज रहा है। शर्त रखी गई है कि ऑडिट होने के बाद ही पेंशन राशि का भुगतान होगा। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से रिटायर्ड कर्मचारी को भटकना पड़ेगा। अनेक प्रकार की परेशानियां होंगी। इस कारण यह व्यवस्था तत्काल समाप्त होना चाहिए। क्योंकि आडिट होगा तो सेवकों को राशि के लिए लंबा इंतजा करना पड़ेगा। सुविधाओं की समीक्षा होना जरूरी:-सिसौदिया मप्र राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष विश्वजीत सिंह सिसौदिया का कहना है कि विभागों में अनेक समस्याएं हैं। उनका आरोप है कि अधिकारी जानबूझकर यह समस्याएं बढ़ा रहे हैं।.

Government should end the system of pre-audit क्या है जाने

 उन्होंने कहा कि विभागों में सैकड़ों अनुकंपा के प्रकरण उलझे पड़े हैं। समय पर उनका समाधान नहीं हो पा रहा है। रिटायर्ड कर्मचारी अपने स्वत्व भुगतान के लिए भटक रहे हैं। पेंशनरों को समय पर अस्पतालों में दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं को लेकर सरकार को समीक्षा करनी चाहिए। जो दोषी अधिकारी हैं। उन प कार्यवाही भी होना चाहिए। शाला सिद्धि में गड़बड़ियों की जांच करवाए सरकार वरिष्ठ कर्मचारी नेता मुरारीलाल सोनी ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि स्कूलों में शुरू करने के बाद फाइलों में एक प्रकार से बंद की गई शाला सिद्धि योजना की जांच की जानी चाहिए। सोनी का कहना है कि इस योजना के प्रभावी संचालन के लिए भारत सरकार द्वारा करोड़ों रुपए की राशि दी गई है।

इस योजना में क्या है खास जानिए

इस योजना में बच्चों का शैक्षणिक गुणात्मक विकास करने के लिए सात आयाम तय होना थे। अधिकारियों ने इस विषय में कोई काम ईमानदारी से नहीं किया और मोटी धनराशि कागजों में खर्च हो गई। सोनी का कहना है कि इसकी विस्तार से जांच करवाई जाए और पूरी राशि का हिसाब मांगा जाए। इस मामले में जो भी दोषी अधिकारी हैं। उन पर भी सख्ती से कार्यवाही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके पूर्व एबीएल कार्यक्रम भी लाया गया था। जिस पर करोड़ों रूपये खर्च हुए, लेकिन बच्चों को इसका कोई लाभ नहीं मिला है।

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बीस साल से विभागों में भर्तियों पर लगा पूर्ण प्रतिबंध, कैसे चलेगा काम

 अफसरों से लेकर मंत्रियों को प्रदेश सहित अन्य राज्यों की सैर करवाते शासकीय वाहन चालकों ने सुविधाएं न मिलने का दर्द बताया है। इनका कहना है कि पिछले 20 साल से भर्तियों पर प्रतिबंध लगा हुआ है। जबकि काम का अधिक भार बढ़ रहा है। अन्य समस्याएं भी हैं, जिन पर सरकार का कोई ध्यान नहीं जा रहा है। मध्यप्रदेश शासकीय वाहन चालक यांत्रिक कर्मचारी संघ भोपाल जिला शाखा की महत्वपूर्ण बैठक मंत्रालय मल्टी पार्किंग स्थित संघ कार्यालय पर रखी गई। जिसमें भोपाल जिला शाखा के अध्यक्ष अशोक कुमार शुक्ला के द्वारा कार्यकारिणी की घोषणा की गई। घोषणा के पश्चात सरकार द्वारा कर्मचारी की मांगों को अनदेखा किया जा रहा है। शुक्ला के अनुसार कर्मचारियों की मांगों को नहीं माना जा रहा है। उसको लेकर आंदोलन करने की रणनीति बनाई गई है। उनका कहना है कि केंद्र के समान महंगाई भत्ता जिया जाए। वाहन चालकों की भर्ती पर लगा प्रतिबंध हटाया जाना चाहिए। वाहन चालकों की भर्ती आवश्यक है।

शुक्ला का कहना है कि पिछले करीब 20 सालों से भर्तियों पर प्रतिबंध लगा हुआ है। काम कई गुना बढ़ा है जबकि अमला लगातार घट रहा है। नियमित भर्ती करने की बजाय आउट सोर्सिंग के माध्यम से काम करवाया जा रहा है। शासकीय विभागों में वाहन क्रय किए जाएं। आउटसोर्सिंग प्रथा को बंद किया जाए और उन वाहन चालकों को संविदा नियुक्ति दी जाए। प्रमोशन पर लगा प्रतिबंध को हटाया जाना चाहिए। कार्यभारित कर्मचारियों से वसूली बंद हो। कार्यभारित प्रथा को खत्म किया जाए इन कर्मचारियों को अवकाश नगदीकरण का लाभ दिया जाए। अन्य मांगों को लेकर अगले सप्ताह संभागी बैठक में सरकार के खिलाफ आंदोलन की तारीखों की घोषणा की जाएगी। बैठक में संघ के प्रांत अध्यक्ष साबिर खान सहित समस्त भोपाल में निवासरत समस्त प्रांतीय पदाधिकारी उपस्थित हुए संभाग अध्यक्ष एवं संभाग के पदाधिकारी उपस्थित हुए।

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