क्लास-1 ऑफिसर को सालभर में 20 हजार और क्लास-2 को 16 हजार रु. का होगा नुकसान

निजी कंपनियों, कारखानों, निगम, मंडलों, विश्वविद्यालयों, केंद्र व राज्य के सार्वजनिक उपक्रम, नगर पालिका और नगर निगम में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एक और बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार ने इन अधिकारियों एवं  कर्मचारियों को पीएफ अकाउंट पर मिलने वाली ब्याज दर 8.50% से घटाकर 3.10% कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईपीएफ पर ब्याज दर 0.40% कम होने से प्रथम श्रेणी अधिकारी को साल भर में 20 हजार और द्वितीय श्रेणी अधिकारी को 16 हजार का नुकसान होगा। 2 साल में दूसरी बार घटाई ब्याज दर- ईपीएफ मामलों के जानकार एवं नेशनल एंप्लाइज कोऑर्डिनेशन कमेटी के ज्वाइंट सेक्रेट्री चंद्रशेखर परसाई के मुताबिक केंद्र सरकार द्वारा पिछले 2 साल में दूसरी बार ईपीएफ की ब्याज दर कम की गई है। 2019- 20 में ब्याज दर 8.65% से घटाकर 8.50% कर दी थी। अब यह 8.50 % से 0.4 0% घटाकर 8.10% कर दी गई है।

सालभर में किस श्रेणी को कितना नुकसान
प्रथम श्रेणी अधिकारी – 20000
द्वितीय श्रेणी अधिकारी – 16000
तृतीय श्रेणी कर्मचारी – 12000
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी – 6000

परसाई के मुताबिक किसी द्वितीय श्रेणी अधिकारी के पीएफ अकाउंट में यदि 40 लाख रुपए जमा है तो इस पर यदि 8.50% से ब्याज मिलता तो साल भर में यह राशि 3.40 लाख होती। घटाई गई दर 0.40% के बाद 40 लाख रुपए जमा राशि पर साल भर में ब्याज की राशि 3.24 लाख रुपए होगी। इस तरह साल भर में 16 हजार का नुकसान होगा। प्रथम श्रेणी एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के पीएफ का अंश तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की तुलना में ज्यादा करता है। विशेषज्ञों ने बताया कि कोरोना काल में भी 6 महीने तक केंद्र सरकार ने ईपीएफ के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को मिलने वाली ब्याज की राशि नहीं दी थी।

चालीस सालों में सबसे कम हुई पीएफ की ब्याज दर:-

40 साल में सबसे कम ब्याज कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उनकी सैलरी का एक निश्चित हिस्सा (12%) पीएफ खाते में जमा किया जाता है. इतनी ही राशि उसके एम्प्लॉयर को इस खाते में जमा करनी होती है. हालांकि एम्प्लॉयर के अंशदान का एक हिस्सा कर्मचारी के पेंशन फंड में जाता है. ईपीएफओ इस पूरे फंड का प्रबंधन करता है और हर साल इस राशि पर ब्याज देता है। वित्त वर्ष 1977-78 में EPFO ने लोगों को पीएफ जमा पर 8% ब्याज दिया था. तब से ये लगातार इससे ऊपर बना रहा है और अब 40 साल में मिलने वाला सबसे कम ब्याज है। ईपीएफओ के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी ने शनिवार को हुई बैठक में पीएफ के ब्याज घटाने का फैसल किया है। पीएफ जमा पर ब्याज घटाने से पहले ही ईपीएफओ को ट्रेड यूनियनों की तरफ से भारी विरोध का सामना करना पड़ा है।

Class1-Class2 loss of 20 thousand
Class1-Class2 loss of 20 thousand

CBT का फैसला EPFO के लिए बाध्यकारी सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी (CBT) का फैसला ईपीएफओ के लिए बाध्यकारी होता है. ये एक त्रिपक्षीय इकाई है जिसमें सरकार, कर्मचारी और नियोक्ता संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं. इसकी अध्यक्षता श्रम मंत्री करते हैं. हालांकि सीबीटी द्वारा तय की गई ब्याज दरों की अधिसूचना जारी करने से पहले वित्त मंत्रालय इसकी समीक्षा करता है. अधिसूचना जारी होने के बाद ब्याज की राशि EPFO Subscriber के खाते में जमा कर दी जाती है। वित्त मंत्रालय लंबे समय से श्रम मंत्रालय से पीएफ जमा पर दिए जाने वाले ब्याज को कम करने के लिए कह रहा है. वित्त मंत्रालय का कहना है कि इस पर ब्याज दर को बाकी अन्य लघु बचत योजनाओं के बराबर लाया जाए।

क्या है ईपीएफ:-

ईपीएफ को अंग्रेजी में इंप्लॉइज प्रोविडेंट फंड और हिंदी में कर्मचारी भविष्य निधि कहते हैं. इसी से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ बनता है. यूं कहें कि ईपीएफ को संभालने के लिए सरकार की तरफ से ईपीएफओ बनाया गया है. फंड के पैसे की देखभाल और रखवाली यही संस्था करती है। ईपीएफ ऐसी स्कीम है जिसमें कोई कर्मचारी अपनी तनख्वाह का कुछ हिस्सा जमा करता है. यह पैसा उसकी भविष्य निधि अर्थात आगे के खर्च के लिए जमा किया जाता है। ऐसा नहीं है कि ईपीएफ में केवल कर्मचारी ही पैसा जमा करता है बल्कि उसकी कंपनी भी एक हिस्सा जमा करती है जहां कर्मचारी काम करता है। इस स्कीम को सरकार से समर्थन प्राप्त है और उसमें पैसा हर हाल में सैलरीड कर्मचारियों को जमा कराना अनिवार्य है. इस स्कीम में जमा पैसे को कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद निकालता है। विपरीत परिस्थितियों में पहले भी पैसे निकाले जा सकते हैं. इस स्कीम में 12-12 परसेंट पैसा कर्मचारी और कंपनी की तरफ से जमा किया जाता है।

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