शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही, 26 आदिवासी बच्चे नहीं दे पाएंगे 10वीं बोर्ड परीक्षा

रायसेन जिले के 26 आदिवासी बच्चे आज से शुरू हो रहीं 10वीं बोर्ड परीक्षा में शामिल होने से वंचित हो जाएंगे. इस मामले में शिक्षा विभाग की बडी लापरवाही सामने आई है. जानकारी के मुताबिक इन आदिवासी बच्चों के शिक्षा विभाग ने एग्जाम फार्म ही नहीं भरवाएं। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में 30 जनवरी को मन की बात में रायसेन की कक्षा 10वी आदिवासी छात्र के पत्र की सराहना करते हुए ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया था, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण यहां 26 आदिवासी विद्यार्थियों को कक्षा 10वी के प्रवेश पत्र नहीं आए थे. जिसके बाद इस मामले में कलेक्टर अरविंद दुबे ने केएम शाह ब्लॉक एजुकेशन अधिकारी, आरएस अहिरवार संकुल प्राचार्य ईंटखेड़ी और दीनदयाल उइके प्रभारी प्राचार्य शासकीय हाई स्कूल उमरई बेहरा को निलंबित कर दिया है,।

जबकि जिला शिक्षा अधिकारी एमएल राठौरिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में 30 जनवरी को मन की बात में रायसेन की कक्षा 10वी आदिवासी छात्र के पत्र की सराहना करते हुए ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया था, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण यहां 26 आदिवासी विद्यार्थियों के कक्षा 10वी के प्रवेश पत्र नहीं आए। शुक्रवार से मप्र में माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षाएं आयोजित हो रही हैं। नवदुनिया में खबर प्रकाशित होने के बाद शुक्रवार को सुबह से प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ और बच्चों को खोजकर परीक्षा में बिठाया है। इन बच्चों को नए रोल नम्बर देकर परीक्षा की अनुमति प्रमुख सचिव शिक्षा विभाग से ली गई है। इस मामले में प्राचार्य डीडी उइके को निलंबित कर दिया गया है।

कलेक्टर के आदेश पर बैठे बच्चे:-

वहीं शिक्षा विभाग की लापरवाही और परीक्षा से वंचित होने का मामला ज़ी मीडिया ने प्रमुखता से उठाया था. उसके बाद इस मामले में कलेक्टर अरविंद दुबे ने संज्ञान लेकर प्रमुख सचिव शिक्षा से बात कर बच्चों को विशेष अनुमति के तहत परीक्षा में शामिल तो करा दिया लेकिन प्रदेश के शिक्षा मंत्री इन्द्र सिंह परमार इस मामले को लेकर बहुत नाराज हैं. यहां शिक्षा विभाग की मॉनिटरिंग और आदिवासी बच्चों के भविष्य के साथ किये जा रहे खिलवाड़ की पोल भी खुल गई है। ऐसे सामने आई लापरवाही:-दरअसल मामला शासकीय हाई स्कूल के उमरई बेहरा का है।

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बच्चों के परिजन परीक्षा को लेकर परेशान हो रहे थे. उनका कहना था कि उन्होंने फीस भी दी थी. उसके बाद भी बच्चों के प्रवेश फार्म नहीं आये. हालांकि जिला शिक्षा अधिकारी एम एल राठौरिया भी लापरवाही पूर्ण जबाब दे रहे थे कि बच्चों ने एग्जाम फीस ही नहीं भरी थी। विशेष अनुमति से परीक्षा दिलाई:-हालांकि परीक्षा से वंचित हो रहे आदिवासी बच्चों को कलेक्टर अरविंद कुमार दुबे ने प्रशासनिक व शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि विद्यार्थियों को विशेष अनुमति प्रदान करते हुए परीक्षा दिलाई जाए. इस विशेष अनुमति के तहत कक्षा 10वीं के माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल की ओर से जारी किए गए नामांकन के बाद इन विद्यार्थियों को अतिरिक्त नामांकन क्रमांक दिए गए हैं।

9वीं-11वीं की परीक्षा के संबंध में निर्देश जारी:-

एमपी बोर्ड की 9वीं क्लास की परीक्षा 16 मार्च और 11वीं की 15 मार्च से शुरू होने जा रही हैं। पहली बार है, जब परीक्षा का समय सुबह 8.30 बजे से दोपहर 11.30 बजे रखा गया है। छात्रों को परीक्षा शुरू होने से 30 मिनट पहले पहुंचना अनिवार्य है। इस संबंध में लोक शिक्षण मध्यप्रदेश के संचालक केके द्विवेदी ने निर्देश जारी कर चुके हैं। राज्य स्तर से कक्षा 9वीं एवं 11वीं की वार्षिक परीक्षा मध्यप्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित की जाएगी। इसमें कोरोना गाइड लाइन का पालन किया जाएगा। परीक्षा के लिए मध्यप्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा परिषद प्रश्न पत्र के विषयों की सूची भी उपलब्ध कराई गई है।

दिव्यांग व लिखने में असमर्थ छात्रों को मिलेंगी ये सुविधाएं-मंडल द्वारा संचालित परीक्षाओं में सम्मिलित होने वाले केवल “दृष्टिहीन, मानसिक विकलांग एवं हाथ की हड्डी टूट जाने अथवा हाथ की खराबी के कारण लिखने में असमर्थ छात्रों को लेखक चयन / विषय चयन / अतिरिक्त समय / परीक्षा शुल्क से छूट/ कम्प्यूटर या टाइप रायटर चयन की सुविधाएं दी जाएंगी। परीक्षाओं में सम्मिलित होने वाले दिव्यांग छात्र/छात्राओं को भी उपरोक्त सुविधाएं दी जाएगी।

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